बिजली विभाग की कुंभकर्णी नींद से कभी भी जा सकती है ग्रामीणों की जान, तिल्हापुर ग्राम पंचायत में मौत को खुला न्योता 

 कौशाम्बी,संवाददाता श्रीकुश मिश्रा की खास रिपोर्ट 

नेवादा विकास खंड के तिल्हापुर ग्राम पंचायत में बिजली विभाग की घोर लापरवाही ग्रामीणों की जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।कई वर्षों से टूटे हुए बिजली के खंभे आज तक दुरुस्त नहीं किए गए हैं, जबकि ग्रामीण बार-बार शिकायत कर चुके हैं। विभाग हर बार केवल एक ही रटा-रटाया जवाब देता है — “बिजनेस प्लान में प्राक्कलन बन रहा है, शिकायत ऊपर भेज दी गई है।”ग्रामीणों का सवाल है कि जब किसी की जान चली जाएगी, तब क्या प्राक्कलन बनेगा?

पांच फुट ऊंचाई पर झूलती मौत

ग्राम पंचायत में दो बिजली के पोल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।

एक पोल की बिजली की तार जमीन से मात्र लगभग पांच फुट की ऊंचाई पर झूल रही है, जिससे बच्चे, बुजुर्ग और मवेशी कभी भी करंट की चपेट में आ सकते हैं।

दूसरे सिरे पर हालात और भी भयावह हैं — तिल्हापुर पुलिस चौकी के ठीक सामने नीम के पेड़ में तारों का जाल बनाकर अवैध व असुरक्षित कनेक्शन दिया जा रहा है।

यह स्थिति न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि प्रशासन और बिजली विभाग की निष्क्रियता का जीता-जागता सबूत भी है।

हादसे का इंतजार कर रहा विभाग

ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग तभी जागता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है।

बारिश के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। हल्की बारिश या तेज हवा में तार टूटकर गिर सकती है, जिससे किसी भी वक्त जानलेवा हादसा हो सकता है।

जिम्मेदारी आखिर किसकी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि

👉 अगर किसी ग्रामीण, बच्चे या मवेशी की जान जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

👉 क्या बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

👉 पुलिस चौकी के सामने खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, अधिशासी अभियंता विद्युत, और संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उनका कहना है कि अगर जल्द ही टूटे पोल और झूलती तारों को ठीक नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस खबर के बाद जागता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच के आदेश दिए जाएंगे।

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