समय पर पहुंची 1962 पशु हेल्पलाइन टीम ने बचाई गोमाता की जान, ग्रामीणों ने किया सम्मान

संवाददाता - सुनील वर्मा

बाराबंकी जिले के ब्लॉक बनीकोडर अंतर्गत ग्राम प्रतापपुर में एक लावारिस गोमाता रात के समय असहनीय प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बच्चे के पैर बाहर निकल आए थे और गोमाता की जान पर संकट बना हुआ था।गांव के बच्चों और अमरेश नामक युवक ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल पशुपालन विभाग की हेल्पलाइन नंबर 1962 पर सूचना दी। सूचना मिलते ही 1962 की आपातकालीन पशु चिकित्सा टीम, जिसमें डॉ. बीरेंद्र वर्मा, सहयोगी बृजेंद्र वर्मा और पायलट विपिन कुमार शामिल थे, मौके पर पहुंची।टीम ने कड़ी मेहनत और सूझबूझ से उपचार करते हुए सफलतापूर्वक बछड़े को बाहर निकाला और गोमाता की जान बचाई। डॉक्टरों की तत्परता और कुशल उपचार से गोमाता को नया जीवन मिला।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर और उनकी टीम नहीं पहुंचती, तो गोमाता को बचा पाना मुश्किल हो जाता। गांव के लोगों ने पशु चिकित्सा टीम की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।

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