सच की जीत, झूठ की हार — एसपी राजेश कुमार ने एक बार फिर निर्दोष को जेल जाने से बचाया, 48 घंटों के अंदर हत्या करने वाले आरोपी तक पहुँची कानून की पकड़,भेजा गया सलाखों के पीछे

श्रीकुश मिश्रा/कौशाम्बी। जब भी किसी निर्दोष पर अपराध का साया मंडराता है, तब न्याय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस पर होती है। कौशाम्बी में एक बार फिर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने साबित कर दिया कि उनकी पुलिसिंग सिर्फ अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि निर्दोष को बचाने की संवेदनशील जिम्मेदारी भी निभाती है।हाल ही में सामने आए एक गंभीर हत्या मामले में शुरुआती परिस्थितियाँ ऐसी थीं कि एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपी ठहराया जा रहा था। लेकिन एसपी राजेश कुमार की सूझबूझ, अनुभव और गहन जांच के निर्देशों ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी। उन्होंने मामले की हर कड़ी को दोबारा परखने, तकनीकी साक्ष्यों की पुष्टि करने और टीम को निष्पक्ष जांच के लिए स्पष्ट निर्देश दिए। एसपी के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और घटनास्थल से जुड़े हर साक्ष्य का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया। जांच के दौरान धीरे-धीरे सच सामने आया और असली आरोपी की पहचान हुई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वास्तविक अपराधी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि निर्दोष व्यक्ति को जेल जाने से बचा लिया गया। यह घटना केवल एक अपराध का खुलासा नहीं, बल्कि न्याय की उस भावना का प्रतीक है, जिसमें सत्ता नहीं, सच सर्वोपरि होता है। एसपी राजेश कुमार की कार्यशैली ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब नेतृत्व ईमानदार और संवेदनशील हो, तो कानून सिर्फ दंड नहीं देता, बल्कि न्याय भी करता है। कौशाम्बी पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल अपराधियों में डर पैदा हुआ है, बल्कि आम जनता का पुलिस पर भरोसा भी और मजबूत हुआ है। यह मामला बताता है कि कौशाम्बी में कानून सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी काम कर रहा है।

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