लोकेशन= उन्नाव | विकासखंड बिछिया – ग्राम पवई
संवाददाता= ऋषि त्रिपाठी
उन्नाव एक ओर केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर गांव-गांव स्वच्छता और विकास के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्नाव जनपद के विकासखंड बिछिया अंतर्गत ग्राम पवई में इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।ग्राम पवई की मुख्य नाली की स्थिति अत्यंत दयनिय और भयावह बनी हुई है। नाली में वर्षों से जमा गंदगी, कीचड़ और बजबजाते कीड़ों के कारण आस-पास से गुजरने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बदबू और फिसलन के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और स्वच्छता के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है। नाली सफाई, जल निकासी और जनसुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।हालात इतने खराब हो गए कि अंततः गांव के एक समाजसेवी व्यक्ति को आगे आना पड़ा। समाजसेवी ने अपने निजी खर्चे से लेबर लगवाकर और ट्रैक्टर खड़ा कराकर नाली की सफाई का कार्य कराया, तब जाकर ग्रामीणों ने कुछ राहत की सांस ली। यह सवाल खड़ा करता है कि जब सरकार स्वच्छता के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो फिर सरकारी जिम्मेदारी समाजसेवियों के कंधों पर क्यों छोड़ी जा रही है?ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास को नहीं बल्कि जातिवाद और पक्षपात को महत्व दिया जा रहा है, जिसके चलते वास्तविक जरूरतों की अनदेखी हो रही है। यही कारण है कि ग्राम पवई में स्वच्छ भारत मिशन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
क्या ग्राम प्रधान और सचिव की यह लापरवाही सरकार की छवि धूमिल करने का कार्य नहीं कर रही?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी?
क्या शासन-प्रशासन जागेगा या ग्रामीण यूं ही नारकीय जीवन जीने को मजबूर रहेंगे?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि दोषी ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और गांव में स्थायी समाधान के साथ नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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